द्वारका

विवाह मुहूर्त 2026: शुभ तिथियाँ और समय

हिंदू विवाह के लिए शुभ तिथियाँ और समय। खरमास, चातुर्मास और गुरु या शुक्र के अस्त रहने पर विवाह नहीं होते, इसलिए विवाह मुहूर्त साल के कुछ ही महीनों में मिलते हैं।

66 मुहूर्त · द्वारका

फ़रवरी 2026

  • फ़रवरी4बुधवार01:05 – 07:31 (5 फ़रवरी)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: कृष्ण चतुर्थी
  • फ़रवरी5गुरुवार07:31 – 07:30 (6 फ़रवरी)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्ततिथि: कृष्ण चतुर्थी, कृष्ण पंचमी
  • फ़रवरी6शुक्रवार07:30 – 23:37नक्षत्र: हस्ततिथि: कृष्ण पंचमी
  • फ़रवरी8रविवार00:08 – 05:03 (9 फ़रवरी)नक्षत्र: स्वातीतिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी
  • फ़रवरी10मंगलवार07:55 – 01:43 (11 फ़रवरी)नक्षत्र: अनुराधातिथि: कृष्ण नवमी
  • फ़रवरी12गुरुवार20:22 – 03:06 (13 फ़रवरी)नक्षत्र: मूलतिथि: कृष्ण एकादशी
  • फ़रवरी14शनिवार18:16 – 03:18 (15 फ़रवरी)नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: कृष्ण त्रयोदशी
  • फ़रवरी19गुरुवार20:52 – 07:22 (20 फ़रवरी)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: शुक्ल तृतीया
  • फ़रवरी20शुक्रवार07:22 – 01:52 (21 फ़रवरी)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवतीतिथि: शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी
  • फ़रवरी21शनिवार13:01 – 13:23नक्षत्र: रेवतीतिथि: शुक्ल पंचमी
  • फ़रवरी24मंगलवार04:26 – 07:18 (25 फ़रवरी)नक्षत्र: रोहिणीतिथि: शुक्ल अष्टमी, शुक्ल नवमी
  • फ़रवरी25बुधवार07:18 – 07:17 (26 फ़रवरी)नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरातिथि: शुक्ल नवमी, शुक्ल दशमी
  • फ़रवरी26गुरुवार07:17 – 12:11नक्षत्र: मृगशिरातिथि: शुक्ल दशमी

मार्च 2026

  • मार्च2सोमवार13:44 – 17:56नक्षत्र: मघातिथि: शुक्ल चतुर्दशी
  • मार्च2सोमवार05:28 – 07:13 (3 मार्च)नक्षत्र: मघातिथि: शुक्ल पूर्णिमा
  • मार्च3मंगलवार07:13 – 07:31नक्षत्र: मघातिथि: शुक्ल पूर्णिमा
  • मार्च4बुधवार07:39 – 08:53नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: कृष्ण प्रतिपदा
  • मार्च7शनिवार11:16 – 07:04 (8 मार्च)नक्षत्र: स्वातीतिथि: कृष्ण चतुर्थी, कृष्ण पंचमी
  • मार्च9सोमवार16:12 – 23:27नक्षत्र: अनुराधातिथि: कृष्ण षष्ठी
  • मार्च11बुधवार04:43 – 07:05 (12 मार्च)नक्षत्र: मूलतिथि: कृष्ण नवमी
  • मार्च12गुरुवार07:05 – 09:59नक्षत्र: मूलतिथि: कृष्ण नवमी

अप्रैल 2026

  • अप्रैल15बुधवार15:23 – 22:31नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: कृष्ण त्रयोदशी
  • अप्रैल19रविवार04:35 – 06:30 (20 अप्रैल)नक्षत्र: रोहिणीतिथि: शुक्ल तृतीया
  • अप्रैल20सोमवार06:30 – 17:49नक्षत्र: रोहिणीतिथि: शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी
  • अप्रैल20सोमवार04:15 – 06:29 (21 अप्रैल)नक्षत्र: मृगशिरातिथि: शुक्ल पंचमी
  • अप्रैल21मंगलवार06:29 – 12:31नक्षत्र: मृगशिरातिथि: शुक्ल पंचमी
  • अप्रैल25शनिवार02:07 – 06:25 (26 अप्रैल)नक्षत्र: मघातिथि: शुक्ल दशमी
  • अप्रैल26रविवार06:25 – 20:27नक्षत्र: मघातिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
  • अप्रैल27सोमवार21:19 – 21:36नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: शुक्ल द्वादशी
  • अप्रैल28मंगलवार21:05 – 06:23 (29 अप्रैल)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्ततिथि: शुक्ल त्रयोदशी
  • अप्रैल29बुधवार06:23 – 20:52नक्षत्र: हस्ततिथि: शुक्ल त्रयोदशी, शुक्ल चतुर्दशी

मई 2026

  • मई1शुक्रवार10:00 – 21:14नक्षत्र: स्वातीतिथि: शुक्ल पूर्णिमा
  • मई3रविवार07:10 – 22:28नक्षत्र: अनुराधातिथि: कृष्ण द्वितीया
  • मई5मंगलवार19:40 – 06:19 (6 मई)नक्षत्र: मूलतिथि: कृष्ण चतुर्थी
  • मई6बुधवार06:19 – 15:54नक्षत्र: मूलतिथि: कृष्ण चतुर्थी, कृष्ण पंचमी
  • मई7गुरुवार18:46 – 06:18 (8 मई)नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: कृष्ण षष्ठी
  • मई8शुक्रवार06:18 – 12:22नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: कृष्ण षष्ठी
  • मई12मंगलवार01:17 – 06:15 (13 मई)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: कृष्ण एकादशी
  • मई13बुधवार06:15 – 06:15 (14 मई)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवतीतिथि: कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी
  • मई14गुरुवार06:15 – 17:03नक्षत्र: रेवतीतिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी

जून 2026

  • जून21रविवार09:31 – 11:22नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: शुक्ल सप्तमी
  • जून22सोमवार10:31 – 06:11 (23 जून)नक्षत्र: हस्ततिथि: शुक्ल अष्टमी, शुक्ल नवमी
  • जून23मंगलवार06:11 – 10:14नक्षत्र: हस्ततिथि: शुक्ल नवमी
  • जून24बुधवार13:59 – 06:11 (25 जून)नक्षत्र: स्वातीतिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
  • जून25गुरुवार06:11 – 07:08नक्षत्र: स्वातीतिथि: शुक्ल एकादशी
  • जून26शुक्रवार19:16 – 06:12 (27 जून)नक्षत्र: अनुराधातिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी
  • जून27शनिवार06:12 – 22:11नक्षत्र: अनुराधातिथि: शुक्ल त्रयोदशी
  • जून29सोमवार16:17 – 04:04 (30 जून)नक्षत्र: मूलतिथि: शुक्ल पूर्णिमा

जुलाई 2026

  • जुलाई1बुधवार06:51 – 16:05नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
  • जुलाई6सोमवार01:41 – 06:15 (7 जुलाई)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: कृष्ण सप्तमी
  • जुलाई7मंगलवार06:15 – 14:31नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपदतिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी
  • जुलाई11शनिवार00:06 – 06:17 (12 जुलाई)नक्षत्र: रोहिणीतिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
  • जुलाई12रविवार06:17 – 22:30नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरातिथि: कृष्ण त्रयोदशी

नवंबर 2026

  • नवंबर20शुक्रवार06:32 – 07:10 (21 नवंबर)नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवतीतिथि: शुक्ल द्वादशी
  • नवंबर21शनिवार07:10 – 00:13 (22 नवंबर)नक्षत्र: रेवतीतिथि: शुक्ल द्वादशी
  • नवंबर24मंगलवार23:25 – 07:12 (25 नवंबर)नक्षत्र: रोहिणीतिथि: कृष्ण प्रतिपदा
  • नवंबर25बुधवार07:12 – 07:13 (26 नवंबर)नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरातिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
  • नवंबर26गुरुवार07:13 – 17:47नक्षत्र: मृगशिरातिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

दिसंबर 2026

  • दिसंबर2बुधवार08:55 – 07:17 (3 दिसंबर)नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनीतिथि: कृष्ण नवमी, कृष्ण दशमी
  • दिसंबर3गुरुवार07:17 – 10:54नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्ततिथि: कृष्ण दशमी
  • दिसंबर3गुरुवार23:04 – 07:18 (4 दिसंबर)नक्षत्र: हस्ततिथि: कृष्ण एकादशी
  • दिसंबर4शुक्रवार07:18 – 10:23नक्षत्र: हस्ततिथि: कृष्ण एकादशी
  • दिसंबर5शनिवार11:49 – 07:19 (6 दिसंबर)नक्षत्र: स्वातीतिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
  • दिसंबर6रविवार07:19 – 07:42नक्षत्र: स्वातीतिथि: कृष्ण त्रयोदशी
  • दिसंबर11शुक्रवार03:04 – 07:23 (12 दिसंबर)नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: शुक्ल तृतीया
  • दिसंबर12शनिवार07:23 – 03:28 (13 दिसंबर)नक्षत्र: उत्तराषाढ़ातिथि: शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी

समय उस अवधि को दिखाते हैं जिसमें तिथि, नक्षत्र, वार और योग सभी अनुकूल हैं। विवाह जैसे बड़े संस्कारों में इसी अवधि के भीतर लग्न देखकर अंतिम समय तय किया जाता है। रात के बाद का समय अगले दिन की सुबह (सूर्योदय से पहले) का है।

ये मुहूर्त कैसे चुने गए

शुभ नक्षत्र
रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
शुभ वार
रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार
शुभ तिथियाँ
शुक्ल: द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा
कृष्ण: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी
टाले गए योग
अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति
इन समयों को छोड़ा गया है
खरमास (सूर्य धनु या मीन में), चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी), गुरु या शुक्र अस्त, और उदय के बाद के पहले 3 दिन (बाल्यावस्था), गंडांत (आश्लेषा-मघा, ज्येष्ठा-मूल और रेवती-अश्विनी के संधि चरण), अधिक मास, भद्रा (विष्टि करण)

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